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प्रेगनेंट होने के बाद लगता है मिसकैरेज का खतरा,तो इन बातों का रखें ख्याल

नई दिल्लीः गर्भावस्था एक महत्वपूर्ण समय है और इसमें मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा रहना जरूरी है. गर्भावस्था की पहली तिमाही में महिलाओं में मिसकैरेज का खतरा काफी अधिक होता है. हालांकि कुछ बातो को ध्यान में रखकर इस खतरे को कम किया जा सकता है. डॉक्टर बताते हैं कि मिसकैरेज से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि महिलाएं खानपान का ध्यान रखें. इसके लिए अपनी डाइट में फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर संतुलित आहार का सेवन करना महत्वपूर्ण है. फोलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का पर्याप्त सेवन बच्चे के विकास में सहायता करता है. इसके अलावा भी कई बातों का ध्यान रखने की जरूरत है.

क्या है मिसकैरेज

डॉक्टर बताते हैं कि चार महीने तक के भ्रूण में मिसकैरेज का रिस्क रहता है. अगर इस समय के दौरान पीरियड की तरह ब्लड आने लगे तो ये मिसकैरेज का संकेत होता है. 80 फीसदी मिसकैरेज 0 से 13 सप्ताह के दौरान ही होते हैं. कुछ मामलों में जेनेटिक कारणों की वजह से भी यह हो जाता है. किसी इंफेक्शन और प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन में गड़बड़ी के कारण भी गर्भपात हो जाता है. ऐसे में कुछ चीजों से परहेज भी जरूरी है. इसके लिए जंक फूड से दूर रहें, ज्यादा मीठा न खाएं और फलों में पपीता व अनानास का सेवन न करें.

इन बातों का रखें ख्याल

हानिकारक पदार्थों से बचें

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल फरीदाबाद में स्त्री रोग विज्ञान विभाग में डायरेक्टर डॉ. नीति कौतिश बताती हैं कि धूम्रपान, शराब पीने और अत्यधिक कैफीन का उपयोग करने से बचें, क्योंकि ये गर्भपात के खतरे को काफी बढ़ा सकते हैं. अगर आपको कई पुरानी बीमारी जैसे डायबिटीज, हाई बीपी और थायराइड की बीमारी है तो उसको कंट्रोल में रखें. नियमित जांच और डॉक्टर के बताए उपचार का पालन करें. इससे गर्भपात से बचा जा सकता है.

सुरक्षित व्यायाम करें

गर्भावस्था के दौरान नियमित, मध्यम व्यायाम फायदेमंद है, लेकिन वर्कआउट हल्का ही करें. गहरी सांस लेने वाले व्यायाम और रोज टहलना फायदेमंद है. वैसे महिलाओं को एक्सपर्ट की सलाह पर ही फिजिकल एक्टिविटी को करना चाहिए.

मानसिक तनाव कम करें

तनाव का हाई लेवल गर्भावस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है. योग, ध्यान या गहरी साँस लेने वाले व्यायाम जैसी तनाव कम करने वाली तकनीकों का अभ्यास करें. परिवार, दोस्तों और पेशेवर परामर्श से सहायता भी फायदेमंद हो सकती है. अगर प्रेगनेंसी के दौरान पेट में ज्यादा दर्द या कोई दूसरी गंभीर परेशानी लग रही है तो डॉक्टर से संपर्क करें. इस मामले में लापरवाही न करें.

​नियमित टेंपरेचर करें चैक

मिसकैरेज के बाद एक हफ्ते तक रोज बॉडी का टेंपरेचर चैक करें। रोज अपना टेंपरेचर रोज देखें और अगर आपका टेंपरेचर 100 डिग्री फारेनहाइट से ज्‍यादा आए ताे डॉक्‍टर को बताएं। ज्‍यादा टेंपरेचर आना किसी इंफेक्‍शन या कॉम्प्लिकेशन का संकेत हो सकता है जिसका तुरंत इलाज करवाना जरूरी है।

​चार हफ्ते से ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होना

आमतौर पर मिसकैरेज के बाद महिलाओं को पीरियड्स की तरह ब्‍लीडिंग होती है। यह ब्‍ली‍डिंग स्‍पॉटिंग की तरह हो सकती है जबकि कुछ महिलाओं को अधिक ब्‍लीडिंग भी हो सकती है।अगर 4 हफ्ते तक ब्‍लीडिंग होती है और इसके लिए आपको पैड इस्‍तेमाल करने की जरूरत पड़ती है तो आपके लिए इसे नजरअंदाज करना सही नहीं होगा।

अपनी डायट में रोज 400 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड जरूर लें

अपनी डायट में रोज 400 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड जरूर लें। इससे शिशु में जन्‍म विकार का खतरा कम होता है जो कि मिसकैरेज का कारण बन सकता है। कंसीव करने से पहले रोज विटामिन बी लेना शुरू करें। धूम्रपान से दूर रहें और सिगरेट पीने वालों के पास भी न रहें।दिनभर में 300 मिलीग्राम से कम मात्रा में कैफीन लें। अपने वजन को संतुलित रखें, न तो ओवरवेट रहें और न ही अंडरवेट रहें। साफ-सफाई का ध्‍यान रखें जिससे फ्लू और निमोनिया जैसे संक्रमणों से बच सकें। अगर आपका पहले भी मिसकैरेज हो चुका है, तो बेहतर होगा कि आप सेक्‍स से दूरी बना लें।

नियमित प्रीनेटल देखभाल

गर्भधारण के बाद मां समय-समय पर और हो सके छोटे-छोटे अंतराल पर ही प्रीनेटल केयर करती रहे। इससे किसी भी भावी परेशानी से बचा जा सकता है अगर भ्रूण में किसी भी तरह की परेशानी देखी जाएगी तो तुरंत उसे पहचान लिया जाएगा जिससे मिसकैरेज होने का खतरा न के बराबर रह जाता है।

सेहतमंद जीवन शैली

एक अच्छा जीवन जीने के लिए सेहत मत जीवन शैली अपनाना जरूरी है और अब तो आपके गर्भ में एक और जीवन पाल रहा है। ऐसे में एक स्वस्थ और अच्छी जीवन शैली को अपनाने की कोशिश करें कुछ भी ऐसा ना खाएं जिससे आपके बच्चे पर असर हो। आपकी यह सतर्कता मिसकैरेज के खतरे को रोकती हैं। आपको कभी भी गर्भधारण के समय अल्कोहल या धूम्रपान का सेवन नहीं करना चाहिए। पूरी तरीके से बंद करके आप मिसकैरेज के खतरे को बिल्कुल कम कर सकते हैं।

करें क्रॉनिक बीमारियों का प्रबंधन

अगर आप किसी भी क्रॉनिक बीमारियों से पीड़ित है तो गर्भधारण के बाद अपने डॉक्टर को इसके बारे में बताएं। वह गर्भ और आपको देखकर कुछ दवाइयां आपको देंगे जो आपके लिए और आपके दो बच्चे दोनों के लिए स्वास्थ्य कर होंगी। जिससे आप गर्भपात जैसी गंभीर और भावनात्मक प्रक्रिया से गुजरने से बच जाएंगे।

हाइजीन है जरूरी

बात अब केवल आपकी नहीं आपके बच्चे की भी है। इसलिए हाइजीन का पूरा ध्यान रखें कुछ भी ऊल जलूल ना खाएं और कोई भी चीज खाने से पहले अपने हाथों को और उसे चीज को वॉश करके ही खाएं। इससे आप अपने बच्चों को खोने से बच सकती हैं।

भावनात्मक सहयोग है सबसे जरूरी

गर्भधारण के समय मां का खुश रहना बहुत जरूरी है। मन खुश रहेगी तो बच्चा भी खुश रहेगा। इसलिए इस समय तनाव लेने, लड़ाई झगड़ा करने या फिर किसी भी विवाद में पढ़ने से पहले अपने बच्चों के बारे में सोचें। वही परिवार वालों को भी ध्यान देना चाहिए कि गर्भधारण की हुई महिला का पूर्ण रूप से ध्यान रखें उसे खुश रखें ताकि उसे मिसकैरेज जैसी परेशानी से न जूझना पड़

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