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शरद पूर्णिमा पर बांके बिहारी के दर्शन पर होगा चंद्र ग्रहण का असर ,दर्शन के समय में हुआ बदलाव


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नई दिल्लीः शरद पूर्णिमा के अवसर पर ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में ठाकुर बांकेबिहारी गर्भगृह से बाहर जगमोहन में आकर चांदी के सिंहासन पर विराजमान होते हैं। वर्ष में एक दिन बांकेबिहारी शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में सिर पर मोर मुुकुट, होठों पर मुरली और कटि काछिनी, चांदी की पायल धारण करते हैं। इसके अलावा रेशम जरी की श्वेत रंग पोशाक भी धारण करते हैं। महारास के पूर्ण स्वरूप में बांकेबिहारी के विशेष दर्शन करने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन इस बार शरद पूर्णिमा पर 28 अक्तूबर को चंद्रग्रहण के कारण बांकेबिहारी के चंद्रमा की धवल चांदनी में भक्तों को नहीं हो सकेंगे।

दोपहर बाद 3.30 बजे ही ठाकुरजी के पट हो जाएंगे बंद

ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में शरद पूर्णिमा पर 28 अक्टूबर को चंद्रग्रहण के कारण मंदिर के दर्शन समय में बदलाव किया है। मंदिर प्रबंधक मुनीश शर्मा के अनुसार 28 अक्टूबर को सुबह राजभोग सेवा के दर्शन तय समय 7.45 बजे खुलेंगे। तो दोपहर को एक घंटे पहले 10.55 बजे राजभोग आरती के बाद 11 बजे मंदिर के पट बंद हो जाएंगे। जबकि सामान्य दिनों में दोपहर को 12 बजे मंदिर के पट बंद हो रहे हैं।इसी तरह सायंकालीन शयनभोग सेवा के दर्शन दोपहर 12.30 बजे खुलेंगे, जो सामान्य दिनों में शाम 4.30 बजे खुल रहे हैं। तो दोपहर बाद 3.25 बजे शयन आरती करने के साथ 3.30 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे। सूतककाल के कारण दोपहर बाद 3.30 बजे ही ठाकुरजी के पट बंद हो जाएंगे। इसके बाद दूसरे दिन 29 अक्टूबर को नियमित समय 7.45 बजे ही दर्शन खुलेंगे।

शरद पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना

वीकेंड होने के साथ ही 28 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु कान्हा की नगरी वृंदावन में आएंगे। लेकिन इस बार शरद पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण के चलते जन-जन के आराध्य बांके बिहारी जी की आरती और दर्शनों के समय में बदलाव किया गया है। दरअसल शरद पूर्णिमा पर कान्हा के नगरी के लगभग सभी मंदिरों में शरदोत्सव मनाया जाता है। शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में अपने आराध्य के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी यहां पहुंचते हैं। इस बार 28 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा है और दिन शनिवार है। ऐसे में वीकेंड पर शरद पूर्णिमा के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

चंद्रग्रहण से पहले पड़ने वाले सूतक के कारण मंदिर में होने वाली राजभोग और शयन भोग की सेवा दोपहर साढ़े तीन बजे तक होगी। रात को होने वाली शयन आरती दोपहर साढ़े तीन बजे होकर मंदिर के पट बंद हो जाएंगे। इससे पहले ही शरद पूर्णिमा पर होने वाले बांकेबिहारी के दर्शन चांदी के सिंहासन पर होंगे।

शहर के सभी मंदिरों में शाम को बंद रहेंगे पट

शरद पूर्णिमा पर पड़ रहे चंद्रग्रहण के कारण शाम को बांकेबिहारी समेत दूसरे मंदिरों में भी पट बंद रहेंगे। शरद पूर्णिमा का उत्सव तीर्थनगरी के सभी मंदिरों में दोपहर 3.30 बजे तक मना लिया जाएगा। इसके बाद सूतककाल शुरू होने के कारण मंदिरों के पट बंद रहेंगे।

इस समय कर सकेंगे दर्शन

बांके बिहारी मंदिर प्रबंधक मुनीश शर्मा ने बताया कि 28 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पट खुलेंगे और 7 बजकर 55 मिनट पर श्रृंगार आरती होगी और 8 बजे छींटा देकर मंदिर के पट बंद किए जाएंगे। फिर ठाकुरजी की राजभोग सेवा शुरू हो जाएगी। सुबह 10 बजकर 55 मिनट पर ठाकुरजी की राजभोग आरती होगी और साढ़े 11 बजे पट बंद होंगे। वहीं दोपहर साढ़े 12 बजे दर्शनों के लिए पट खुलेंगे और उसके बाद श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन कर सकेंगे।

मंदिर के सेवायत गोपी गोस्वामी ने बताया कि सायंकाल में जब पूर्णिमा के पूर्ण चंद्र की कलाएं विस्तार लेती हैं, तब उसकी चांदनी सीधे मंदिर के जगमोहन में विराजमान बांकेबिहारी के की दिव्य छटा को स्पर्श करती है तो अद्भुत छटा निखर कर आती है। वर्ष में एक बार मिलने वाली ठाकुरजी के इस पल के विशेष दर्शन से भक्तजन वंचित रह जाएंगे। उन्होेंने बताया कि परंपरा अनुसार शरण पूर्णिमा पर दोपहर में ही केसर की मेवायुक्त खीर, चंद्रकला निवेदित की जाएगी।

29 अक्‍टूबर से हो सकेंगे सामान्‍य दर्शन

वहीं, 3 बजकर 25 मिनट पर शयन आरती होगी जिसके बाद साढ़े 3 बजे मंदिर के पट बंद हो जाएंगे और उसके बाद उस दिन श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन नहीं कर सकेंगे। वहीं अलगे दिन 29 अक्टूबर रविवार को सामान्य दिनों की तरह ही श्रद्धालु बांके बिहारी जी का दर्शन कर सकेंगे।

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