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नवरात्रि के 9 दिन इन मंत्रों का करें जाप, होंगे ढेरों लाभ

नई दिल्लीः नवरात्रि की शुरुआत 15 अक्टूबर से होने जा रही है. देशभर में नवरात्रि से जुडी तैयारियां हो गई हैं.नवरात्रि पर्व पर माता महारानी को प्रसन्न करने के लिए आप पूरी विधि विधान से मां दुर्गा की पूजा अर्चना तो करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता को प्रसन्न करने के लिए आपको क्या करना होगा. ज्ञात हो इस 9 दिन के पर्व में हर एक दिन माता के विशेष स्वरूप की उपासना होती है. नवरात्रि में मंत्र का जाप और ध्यान करने से माता खुश होकर आपको खुशहाली और समृद्धि का वरदान देती हैं. खास बात ये है कि नवरात्रि पर माता रानी को खुश करने के लिए लोग तरह-तरह के व्यंजन बनाते हैं. लेकिन नौ दिनों तक नौ रूपों को अलग-अलग चीजों का भोग लगाया जाता है. माता के नौ रूप हैं, हर रूप को अलग-अलग भोजन पसंद है.

इन मंत्रों का करें जाप….

नवरात्रि में दुर्गासप्तशती एवं श्रीमद् देवी भागवत पुराण का भी पाठ किया जाता है. हर दिन मां के अलग-अलग रूपों का ध्यान करने से घर में खुशहाली और समृद्धि आती है. पहले दिन घट स्थापना से मां की आराधना शुरू होकर 9वें दिन हवन के बाद पूर्ण होती है.

पहला दिन- मां शैलपुत्री

  1. आचार्य पं हरिओम मिश्रा ने मां के पहले दिन से 9वें दिन तक के लिए मंत्र के जाप और ध्यान करने के लिए अलग अलग दिन मंत्र और पूजा इस प्रकार से बताया है कि पहले दिन कन्या एवं धनु लग्न में अथवा अभिजिन्मुहूर्त में घटस्थापना की जाएगी. पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की उपासना की जाती है. मां दुर्गा की उपासना में दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यन्त लोकप्रिय है. यह नवरात्रि में ही संपन्न हो जाता है. इसमें कुल 13 अध्याय होते हैं. नवरात्र में श्रीमद्देवीभागवत पुराण के पाठ का भी प्रचलन है. यह पुराण सभी पुराणों में अतिश्रेष्ठ होता है. नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. यदि आप नवरात्रि के पहले दिन गाय के शुद्ध देसी घी का भोग मां शैलपुत्री को लगाते हैं, तो आपकी काया निरोगी रहेगी.माता शैलपुत्री के ध्यान एवं जपनीय मंत्र है.(ॐ शैलपुत्र्यै नमः)

दूसरा दिन- मां ब्रह्मचारिणी

  1. दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की उपासना की जाती है. प्रथम दिन की तरह दुर्गासप्तशती का पाठ करें. साथ ही श्री मद्देवीभागवत का पाठ एवं मां भगवती का ध्यान करने के उपरान्त देवीभागवत के तृतीय स्कन्ध से चतुर्थ स्कन्ध के अष्टम अध्याय तक पाठ करना चाहिए. अन्त में श्रीमद्देवीभागवत पुराण की आरती करनी चाहिए. मां ब्रह्मचारिणी दीर्घायु का वरदान देती हैं. नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाना चाहिए. इससे व्यक्ति को अकाल मृत्यु का डर नहीं रहता.इनका ध्यान एवं जपनीय मंत्र है.(ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः)

तीसरा दिन- मां चंद्रघंटा

  1. तीसरे दिन माता दुर्गा के चन्द्रघंटा स्वरूप की उपासना की जाती है. मां चंद्रघण्टा को दूध से बने व्यंजनों का भोग लगाया जाता है. इस दिन देवीभागवत के चतुर्थ स्कन्ध के 9वें अध्याय से आरंभ करते हुए पंचम स्कन्ध के 18वें अध्याय तक पाठ करना चाहिए. मां चंद्रघंटा को नवरात्र के तीसरे दिन दूध और दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है. ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन का हर दुख खत्म हो जाता है.इनका ध्यान एवं जपनीय मंत्र है.(ॐ चंद्रघण्टायै नमः)

चौथा दिन- मां कूष्मांडा

  1. नवरात्रि के चौथे दिन माता दुर्गा के कुष्मांडा स्वरूप की उपासना की जाती है. मां भगवती का ध्यान करने के बाद देवीभागवत के पंचम स्कन्ध के 19वें अध्याय से आरंभ करते हुए छठवें स्कन्ध के 18वें अध्याय तक पाठ करना चाहिए. मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं. इस दिन ब्राह्मणों को भी मालपुए खिलाने चाहिए. ऐसा करने से बुद्धि का विकास होता है और निर्णय लेने की क्षमता भी काफी हद तक बढ़ जाती है.इनका ध्यान एवं जपनीय मंत्र है.(ॐ कूष्माण्डायै नमः)

पांचवां दिन- मां स्कंदमाता

  1. 5वें दिन माता मां स्कन्दमाता स्वरूप की उपासना की जाती है. देवीभागवत के छठे स्कन्ध के 19वें अध्याय से आरंभ करते हुए 7वें स्कन्ध के 18वें अध्याय तक पाठ करना चाहिए. अन्त में मां भगवती की आरती करें. नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाएं. स्कंदमाता की पूजा करने से आजीवन आरोग्य रहने का वरदान मिलता है. मां का ध्यान मंत्र है.(ॐ स्कन्दमात्रै नमः)

छठां दिन- मां कात्यायनी

नवरात्र के 6वें दिन माता कात्यायनी स्वरूप की उपासना की जाती है. मां भगवती का ध्यान करने के उपरान्त देवीभागवत के 7वें स्कन्ध के 19वें अध्याय से आरंभ करते हुए 8वें स्कन्ध के 17वें अध्याय तक पाठ करना चाहिए. मां कात्यायनी के विशेष पूजन के लिए कुमकुम और हल्दी का अर्चन श्रेष्ठ बताया गया है. मां को दूध से बनी मिठाई जैसे पेडे, खीर आदि का भोग लगाया जाता है. नवरात्रि केछठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है. मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाएं. इससे आपको आकर्षण का आशीर्वाद मिलेगा.इनका ध्यान एवं जपनीय मंत्र है.(ॐ कात्यायन्यै नमः)

    सातवां दिन- मां कालरात्रि

    नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की उपासना की जाती है. मां भगवती का ध्यान करने के उपरान्त देवीभागवत के आठवें स्कन्ध के 18वें अध्याय से आरंभ करते हुए 9वें स्कन्ध के 28वें अध्याय तक पाठ करना चाहिए. देवी कालरात्रि को व्यापक रूप से माता देवी काली, महाकाली भद्रकाली,भैरवी,चामुंडा,चंडी आदि रूपों में से माना जाता है. नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजी होती है. इस दिन माता को गुड़ का भोग लगाया जाता है. गुड़ का भोग लगाने से अचानक आने वाले संकट से रक्षा होती है.इनका ध्यान और जपनीय मंत्र है.(ॐ कालरात्र्यै नमः)

      आठवां दिन- मां महागौरी

      नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की उपासना की जाती है. इस दिन मां भगवती का ध्यान करने के उपरान्त देवीभागवत के 9वें स्कन्ध के 29वें अध्याय से आरंभ करते हुए दसवें स्कन्ध की समाप्ति तक पाठ करना चाहिए. मां महागौरी को लोग नारियल का भोग लगाते हैं. इस दिन लोग कन्या पूजन भी करते हैं. इनके आशीर्वाद से संतान प्राप्ति होती है.इनका ध्यान एवं जपनीय मंत्र है.(ॐ महागौर्ये नम:)

        नौवां दिन- मां सिद्धिदात्री

        नवरात्र के 9वें दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की उपासना की जाती है.देवीभागवत के 11वें स्कन्ध के प्रथम अध्याय से आरंभ करते हुए 12वें स्कन्ध की समाप्ति तक पाठ करना चाहिए. अंतिम दिन पाठ समाप्ति के पश्चात् हवन करना चाहिए. नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. माता को तिल का भोग लगाएं. आकस्मिक मृत्यु का भी आपके मन से निकल जाएगा.इनका ध्यान एवं जपनीय मंत्र है.(ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः)

          हिंदी पंचांग के मुताबिक शारदीय नवरात्रि अश्विन मास की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती हैं और नवमी तिथि तक चलती हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए स्‍वयं धरती पर पधारती हैं और उनके सभी कष्ट दूर करती हैं. यदि नवरात्रि में पूरे भक्ति-भाव और पवित्र मन से मां दुर्गा की अराधना की जाए तो घर-परिवार में हमेशा सुख-शांति रहती है. घर में माता लक्ष्‍मी वास करती हैं और खूब धन देती हैं. मां दुर्गा को प्रसन्‍न करने और उनकी कृपा पाने के लिए कुछ मंत्रों का जाप करना बहुत लाभ देता है. मां दुर्गा के ये मंत्र बेहद प्रभावी हैं. इन मंत्रों का जाप करने से जीवन में आने वाले सभी दोष और बाधाएं दूर हो जाती हैं. इन मंत्रों का नवरात्रि के अलावा भी रोजाना जाप करना बहुत लाभदायी है.

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