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जाने गुजराती नववर्ष, अन्नकूट और गोवर्धन पूजा के बारे में… क्या है महत्व ?

नई दिल्ली – गुजरातियों का नया साल हर साल खुशियां लेकर आता है. दुनियाभर में गुजरातियों ने अपना अलग मुकाम हासिल किया है. भारत में भी बड़े उद्योगपति जैसे अंबानी, अडानी, प्रेमजी, कोटक गुजराती हैं. वहीं, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गुजरात से आते हैं. गुजरातियों के लिए ये दिन बहुत मायने रखता है.

इस शुभ दिन पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का घर में आगमन होता है. गुजराती व्यापारी इस दिन शेयर भी खरीदते और बेचते हैं. उनके अनुसार इस दिन को व्यापार करने का दिन भी माना जाता है. बता दें कि इस दिन व्यापारी खाता बुक की भी पूजा करते हैं ताकि उनका व्यापार बिना किसी रुकावट के चलता रहे. हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस दिन से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का भी संकेत मिलता है.

अन्नकूट क्या है ?
दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) करने की परंपरा है. इस बार गोवर्धन पूजा 6 नवम्बर को शुक्रवार के दिन की जाएगी. इस दिन को अन्नकूट, पड़वा और प्रतिपदा भी कहा जाता है. इस दिन घर के आंगन, छत या बालकनी में गोबर से गोवर्धन बनाए जाते हैं और उनको अन्नकूट (Annakoot) का भोग लगाया जाता है. इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना की जाती है और गोवर्धन पर्वत को भी पूजा जाता है. गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट बनाने और भगवान को इसका भोग लगाने का विशेष महत्त्व (Importance) है. आइये जानते हैं कि ये अन्नकूट क्या है और गोवर्धन पूजा के दिन इसका इतना खास महत्त्व क्यों है.

गोवर्धन पूजा सुबह और शाम दो समय की जाती है. सुबह में जहां भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की धूप, फल, फूल, खील-खिलौने, मिष्ठान आदि से पूजा-अर्चना और कथा-आरती करते हैं, तो शाम को इनको अन्नकूट का भोग लगाकर आरती की जाती है. इस वर्ष गोवर्धन पूजा के लिए सुबह का शुभ मुहूर्त प्रात: 06 बजकर 36 मिनट से प्रात: 08 बजकर 47 मिनट तक है. तो शाम की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 03 बजकर 22 मिनट से शाम 05 बजकर 33 मिनट तक का है.

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