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13 मई 1998 में हुआ था पोखरण 2 परीक्षण,आज भी है इतना महत्व

नई दिल्ली – इतिहास की कुछ घटनाएं भले ही घटित हो समय घटना अजीब या बेकार लगे, लेकिन बाद में यही घटना सही साबित होती है. आज के युद्ध के माहौल में शायद 24 साल पहले भारत (India) ने जो राजस्थान के पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण (Pokhran 2) किए थे, उनके साथ भी यही बात लागू हो रही है. क्या आज रूस युक्रेन युद्ध से बने वैश्विक हालात यही इशारा कर रहे हैं कि भारत का ऑपरेशन शक्ति करने का फैसला पूरी तरह से सही ही नहीं बल्कि जरूरी भी था.

13 मई 1998 को दोपहर बाद भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ऐलान किया कि देश ने परमाणु परीक्षण सफलता पूर्वक कर लिए हैं और भारत परमाणु सम्पन्न देशों में आ गया है. भारत के इस कदम की जहां देश में तारीफ हुई तो अंततराष्ट्रीय जगत में इसकी आलोचना भी हुई. अमेरिका, जापान, कनाडा, ने भारत की आलोचना करते हुए उस पर प्रतिबंध लगाए तो वहीं ब्रिटेन फ्रांस और रूस ने भारत की आलोचना नहीं की. हां रूस ने इस पर दुख जरूर जताया.

उस समय भारत अल्पमत की सरकारों के दौर से गुजर रहा था. यानि भारतीय राजनीति राजनैतिक स्थायित्व की तलाश में था. कांग्रेस को चुनावों में दो चुनावों से बहुमत मिला नहीं था. और उसी साल फरवरी में भारतीय जनता पार्टी चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी तो बनी थी लेकिन उसके सरकार बनाने के लिए कई दलों का सहयोग लेना पड़ा था. फिर अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस की सरकार बनीं. वाजपेयी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरी रखने का मन बनाकर आई थी.

भारत का उद्देश्य खुद की सुरक्षा को मजबूत करना था. चीन से उसे 1962 से ही खतरा था और यह खतरा बढ़ता जा रहा था. पाकिस्तान से भारत का तनाव भी जगजाहिर था. वहीं रूस से भारत की दोस्ती भी ऐसी नहीं थी कि रूस भारत का हर विपरीत परिस्थिति में साथ देता जबकि अमेरिका विश्व पटल पर खुद को एकमात्र नेता के तौर पर स्थापित करने में लगा था. ऐसे में भारत की बढ़ती शक्ति उसके लिए खतरा ही थी.

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