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राजनीति

MP Exit Poll 2023 : मध्य प्रदेश में कमल या कमलनाथ,क्या है एग्जिट पोल में दावा-जानें

नई दिल्लीःसात नवंबर से लेकर 25 नवंबर तक मिजोरम, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनाव हुए। वहीं, तेलंगाना में आज वोटिंग हो रही है। सभी राज्यों के नतीजे तीन दिसंबर को घोषित किए जाएंगे, लेकिन आज शाम को अलग-अलग मीडिया चैनलों और सर्वे एजेंसियों की तरफ से एग्जिट पोल जारी किए जाएंगे। किस राज्य में किस पार्टी की सरकार बन रही है? किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी? इसका अनुमान इस पोल के जरिए लगेगा।अब आप सोच रहे होंगे कि ये एग्जिट पोल है क्या? कैसे मतगणना से पहले ही ये सरकार बनने और बिगड़ने का दावा कर देते हैं? इसका इतिहास क्या है? एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल में क्या अंतर होता है? इन सभी सवालों का हम आपको जवाब बताएंगे। पढ़िए ये रिपोर्ट…

पहले जान लीजिए ये एग्जिट पोल है क्या?

दरअसल एग्जिट पोल एक तरह का चुनावी सर्वे होता है। मतदान वाले दिन जब मतदाता वोट देकर पोलिंग बूथ से बाहर निकलता है तो वहां अलग-अलग सर्वे एजेंसी और न्यूज चैनल के लोग मौजूद होते हैं। वह मतदाता से वोटिंग को लेकर सवाल पूछते हैं। इसमें उनसे पूछा जाता है कि उन्होंने किसको वोट दिया है? इस तरह से हर विधानसभा के अलग-अलग पोलिंग बूथ से वोटर्स से सवाल पूछा जाता है। मतदान खत्म होने तक ऐसे सवाल बड़ी संख्या में आंकड़े एकत्र हो जाते हैं। इन आंकड़ों को जुटाकर और उनके उत्तर के हिसाब से अंदाजा लगाया जाता है कि पब्लिक का मूड किस ओर है? मैथमेटिकल मॉडल के आधार पर ये निकाला जाता है कि कौन सी पार्टी को कितनी सीटें मिल सकती हैं? इसका प्रसारण मतदान खत्म होने के बाद ही किया जाता है।

कितने लोगों से सवाल पूछा जाता है?


वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद श्रीवास्तव बताते हैं कि एग्जिट पोल कराने के लिए सर्वे एजेंसी या न्यूज चैनल का रिपोर्टर अचानक से किसी बूथ पर जाकर वहां लोगों से बात करता है। इसमें पहले से तय नहीं होता है कि वह किससे सवाल करेगा? आमतौर पर मजबूत एग्जिट पोल के लिए 30-35 हजार से लेकर एक लाख वोटर्स तक से बातचीत होती है। इसमें क्षेत्रवार हर वर्ग के लोगों को शामिल किया जाता है।

मध्य प्रदेश के चुनावी रण में 2,534 उम्मीदवार

मध्य प्रदेश के चुनावी रण में 2,534 उम्मीदवार राज्य की 230 विधानसभा सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इनकी किस्मत का फैसला यूं तो मध्य प्रदेश की जनता 15 नवंबर को ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM में बंद कर चुके हैं. ये पेटियां 3 दिसंबर को खुलेंगी और बताएंगी की मध्य प्रदेश में फिर से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बननी है या कांग्रेस इसबार सत्ता के सिंहासन पर बैठने वाली है. हालांकि नतीजों से पहले एबीपी सीवोटर एग्जिट पोल में इसकी झलक आप पहले ही देख सकते हैं.

मध्य प्रदेश में कमल या कमलनाथ

एबीपी सीवोटर के एग्जिट पोल के जरिए आपको राज्य में बह रही हवा का अंदाजा लग जाएगा और कौन बनेगा मुख्यमंत्री? किस पार्टी को मिलेंगी कितनी सीटें? जैसे कई सवालों के जवाब भी मिल जाएंगे. मध्य प्रदेश में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच ही रहा है. इस बार भी मुकाबला इन्हीं दो दलों के बीच है. हालांकि आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी समेत कई खिलाड़ी कई सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी के बने बनाए खेल को बिगाड़ सकते हैं.

इन दिग्गजों की साख के सहारे बीजेपी-कांग्रेस

मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में इसबार बीजेपी ने अपने मुख्यमंत्री पद के दावेदार का नाम नहीं बताया है. न ही पार्टी ने ये दावा किया है कि वो जीतने पर फिर से शिवराज सिंह चौहान को ही सीएम बनाएगी. बीजेपी ने इसबार कई बड़े चेहरों को मैदान में उतार कर सीएम पद बने सस्पेंस को और भी बढ़ा दिया है. मध्य प्रदेश में इसबार बीजेपी ने कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय के अलावा केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल और नरेंद्र सिंह तोमर को भी चुनावी रण में उतार दिया है.

सट्टा बाजार में बन रही बीजेपी की सरकार

वहीं, एग्जिट पोल से पहले सट्टा बाजार में भी रुपए लोग लगा रहे हैं। मध्य प्रदेश में अब सट्टा बाजी के अंदर बाजी पलटती दिख रही है। बीजेपी पर बुकीज ज्यादा भाव लगा रहे हैं। यह टाइम्स नाऊ नवभारत का दावा है।

भाजपा और कांग्रेस में टक्कर

मध्य प्रदेश में अभी बीजेपी की सरकार है। हालांकि 2018 के चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिली थी। 2020 में विधायकों के पाला बदलने के बाद बीजेपी की सरकार बन गई थी। चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में ही है।

ये मुद्दे रहे हैं हावी


वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में 2018 में 74 फीसदी वोटिंग हुई थी। 2023 के विधानसभा चुनाव में 77 फीसदी वोटिंग हुई है। एमपी में मुख्य चुनावी मुद्दे फ्री की घोषणाएं रही हैं। इसके साथ ही महंगाई और बेरोजगारी भी एक बड़ा मुद्दा है। कांग्रेस महंगाई और बेरोजगारी को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ रही है।

जानें एमपी के अलग-अलग क्षेत्रों में कितनी सीटें

वहीं, मध्य प्रदेश के मध्य में 25, निमाड़ में 28, चंबल में 34 सीट, महाकौशल में 42, मालवा में 45 और बघेलखंड में 56 सीट है।कांग्रेस पार्टी की बात करें तो जीतने के बाद यहां कमलनाथ के हाथ में ही राज्य की कमान सौंपी जाएगी. कांग्रेस की तरफ से कमलनाथ के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी जमकर पसीना बहाया है. अब ये देखना होगा कि क्या कांग्रेस 2018 की तरह कोई करिश्मा दिखा सरकार बना पाएगी या फिर बीजेपी का कमल मध्य प्रदेश में खिलेगा.

एमपी में हुई है बंपर वोटिंग


वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार बंपर वोटिंग हुई है। पहली बार पूरे प्रदेश में 77 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई है। महिलाओं ने भी इस बार रेकॉर्ड तोड़ वोटिंग की है। एमपी चुनाव में महिलाओं ने 76 फीसदी वोटिंग की है।

महिलाओं ने किया बम्पर मतदान

मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों के लिए 17 नवंबर को मतदान हुआ था। विधानसभा चुनावों के सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए इस बार 77.15% वोटिंग हुई है। इससे पहले 2018 में 74.97% वोटिंग हुई थी। इस बार सि

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