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जाने क्या होती है वॉटर बर्थ डिलीवरी

नई दिल्ली – अगर आप भी बच्चे को जन्म देने के लिए वॉटर बर्थ का विकल्प चुनना चाहती हैं, तो पहले इसके बारे में जानना जरूरी है. दरअसल वॉटर बर्थ डिलीवरी भी नॉर्मल डिलीवरी ही होती है. इसमें भी महिला को प्रसव पीड़ा बर्दाश्त करनी पड़ती है. इसमें महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान गुनगुने पानी वाले टब में बैठाकर डिलीवरी करायी जाती है. सामान्य शब्दों में समझा जाए तो हल्के गर्म पानी के टब में बच्चे को जन्म देने की प्रक्रिया को वॉटर बर्थ कहा जाता है.

वॉटर बर्थ कराते समय महिला के शरीर के हिसाब से टब में पानी की मात्रा को निर्धारित किया जाता है. आमतौर पर टब में करीब 500 लीटर गुनगुना पानी रखा जाता है. टब की गहराई कम से कम ढाई से तीन फिट तक होती है. लेबर पेन शुरू होने के कितने घंटे बाद महिला को टब में बैठना है, ये फैसला विशेषज्ञ करते हैं.

वॉटर बर्थ में डिलीवरी के दौरान एंड्रोफिन हार्मोन ज्यादा बनते हैं, जिसके कारण दर्द कम होता है और दर्द कम होने से बच्चे को भी जन्म लेते समय बहुत कष्ट नहीं सहना पड़ता. इससे महिला को बहुत स्ट्रेस नहीं होता, ऐसे में बीपी बढ़ने जैसी समस्या नहीं झेलनी पड़ती. गर्म पानी के कारण टिश्यू काफी सॉफ्ट हो जाते हैं जिसके कारण योनि में होने वाला खिचाव और टियरिंग भी कम होती है.

वॉटर डिलीवरी में दर्द सामान्य डिलीवरी की अपेक्षा कम होता है. साथ ही इसे सुरक्षित भी माना जाता है. कहा जाता है कि इस डिलीवरी में महिला व बच्चे दोनों को संक्रमण का खतरा कम होता है. बता दें कि वॉटर बर्थ कोई नया तरीका नहीं है, बल्कि ये बहुत प्राचीन तरीका है. मिस्र और यूनान में इस तरीके का इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है.

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