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कमजोर इम्यूनिटी वाले रहे सतर्क, ‘मेनिंगोकोकल मेनिंजाइटिस’ बीमारी में दो दिन में हो जाती है मरीज की मौत


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नई दिल्ली – न्यूमोकॉकल निमोनिया की तरह, वायरस और बैक्टीरिया से फैलने वाली कई अन्य बीमारियों की रोकथाम, वैक्सीन से की जा सकती है। ऐसी ही एक बीमारी है मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस। इससे होने वाली मृत्यु की दर बेहद उच्च है। मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करता है और अगर इसका इलाज न किया जाए, तो मस्तिष्क को गंभीर क्षति पहुंच सकती है।

दरअसल कोरोना के अलावा भी दुनिया में ऐसी कई बीमारियां हैं, जो बेहद ही संक्रामक और जानलेवा हैं। मेनिंगोकोकल मेनिंजाइटिस यह एक संक्रामक, लेकिन दुर्लभ बीमारी है। कोरोना की तरह ही इसका संक्रमण भी संक्रमित मरीज के खांसने या छींकने से हवा की सूक्ष्म बूंदों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि मेनिंगोकोकल एक प्रकार का संक्रमण है, जो नाइसीरिया मेनिनजाइटिडिस नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। इसके संक्रमण का भी हाल कुछ-कुछ कोरोना वायरस की तरह ही है, यानी कई लोगों के शरीर में मेनिंगोकोकल के बैक्टीरिया मौजूद होते हैं और वो बीमार नहीं पड़ते हैं, लेकिन दूसरों को वो संक्रमित जरूर कर सकते हैं।

अक्सर, लक्षण की शुरुआत के बाद 24 से 48 घंटों के भीतर मरीजों की मौत हो जाती है। यहां तक कि जीवित रहने वालों 5 में से 1 मरीज को आजीवन जटिलताओं का अनुभव हो सकता है, जैसे कि सुनाई न पड़ना, मस्तिष्क क्षति, मानसिक विकलांगता या अंगों की हानि। हालांकि मेनिंगोकोकल रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है, लेकिन यह अक्सर पांच साल से कम उम्र के बच्चों, रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी वाले व्यक्तियों, किशोरों और युवा वयस्कों में देखा गया है। इस बीमारी की रोकथाम में बड़े सुधार हुए हैं। इसका एक निवारक उपाय, टीकाकरण है जो जीवन को बचा सकता है और जटिलताओं को कम कर सकता है। इसके अलावा, स्वच्छता और संक्रमित व्यक्तियों से बच्चों की सोशल डिस्टेंसिंग भी रोकथाम के लिए आवश्यक है।

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