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मशहूर लेखिका के खिलाफ लगा UAPA, लेखिका अरुंधति रॉय पर चलेगा आतंकवाद विरोधी कानून

मुंबई – देश की जानी मानी लेखिका अरुंधति रॉय के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) एक्ट (यूएपीए) के तहत केस चलाने की मंजूरी दी गई है. दिल्ली का उपराज्यपाल (एलजी) विके सक्सेना ने शुक्रवार को रॉय और सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर के इंटरनेशल लॉ के पूर्व प्रोफेसर डॉ. शेख शौकत हुसैन के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है. दोनों के खिलाफ 2010 में केस दर्ज कराया गया था.

अरुंधति रॉय के खिलाफ सख्त गैरकानूनी गतिविधि

अरुंधति रॉय के खिलाफ सख्त गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है. 21 अक्टूबर, 2010 को ‘आजादी-द ओनली वे’ बैनर के तहत राजनीतिक कैदियों की रिहाई समिति द्वारा एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें बुकर पुरस्कार विजेता राइटर अरुंधति रॉय ने कार्यक्रम में कथित तौर पर देश विरोधी बयान दिया. दर्ज की गई एक FIR में अरुंधति रॉय समेत कई वक्ताओं पर सम्मेलन में ‘भड़काऊ’ भाषण देने का आरोप लगाया गया था.

कश्मीर के कार्यकर्ता ने दर्ज की थी शिकायत

शिकायतकर्ता सुशील पंडित, जो कश्मीर के एक कार्यकर्ता हैं, ने सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत नई दिल्ली के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी, जिन्होंने 27 नवंबर, 2010 को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश के साथ शिकायत का निपटारा किया था.

ये हैं कठोर प्रावधान

यूएपीए कानून के सेक्शन 43डी (2) के तहत पुलिस हिरासत के समय को दोगुना तक बढ़ा सकती है. इसके तहत 30 दिन की पुलिस हिरासत मिल सकती है. वहीं, न्यायिक हिरासत 90 दिन तक की हो सकती है, जबकि अन्य कानून के तहत हिरासत केवल 60 दिन की होती है. इतना ही नहीं यूएपीए कानून के तहत केस दर्ज होने पर अग्रिम जमानत नहीं मिलती है. यूएपीए कानून के सेक्शन 43डी (5) के तहत अगर प्रथमदृष्टया उस पर केस बनता है तो अदालत भी उसे जमानत नहीं दे सकती. इसमें सात साल की सजा से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है. साथ ही आरोपी की संपत्ति जब्त भी की जा सकती है.

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