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फिल्म ‘बवाल’ पर थम नहीं रहा बवाल,इस्राइली एंबेसी ने फिल्म के इस सीन पर जताई आपत्ति

मुंबई – वरुण धवन और जाहन्वी कपूर की फिल्म बवाल ओटीटी पर रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म को लेकर अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल दर्शकों के एक वर्ग ने फिल्म के उस सीन की आलोचना की है जो ऑश्र्वित्ज के नरसंहार से प्रेरित था। एक यहूदी संगठन ने फिल्म को प्राइम वीडियो से हटाने की मांग की और ओपन लेटर लिखा है, जिसमें ओटीटी प्लेटफॉर्म से ‘बावल’ की स्ट्रीम पर रोक लगाने की गुजारिश की गई है। अब इसपर भारत में इस्राइल के राजदूत नाओर गिलोन ने भी रिएक्शन दिया है। नितेश तिवारी की निर्देशित फिल्म ‘बवाल’ को सेलेब्स का पॉजिटिव रिव्यू मिला है। कुछ दिनों पहले वरुण ने बताया था कि पहली बार उन्हें किसी फिल्म के लिए ढेर सारे कॉल आए। जहां दोनों सितारों को अपनी-अपनी परफॉर्मेंस के लिए वाहवाही मिल रही है,

वहीं इजराइल एम्बेसी ने वर्ल्ड वॉर 2 वाले सीन पर आपत्ति जताई है। दरअसल, फिल्म में वैवाहिक कलह की तुलना ऑशविट्ज से और लालची लोगों की तुलना हिटलर से की गई है। इसी पर विवाद है।इससे पहले एसडब्ल्यूसी एसोसिएट डीन और ग्लोबल सोशल एक्शन के निदेशक रब्बी अब्राहम कूपर ने कहा था, ‘फिल्म में दिखाया गया पार्ट इंसानों की बुराई करने का एक उदाहरण है।’ कूपर ने कहा, ‘इस फिल्म में नितेश तिवारी ने घोषणा की कि ‘हर रिश्ता ऑशविट्ज़ के जरिए चलता है, हिटलर के नरसंहार शासन के हाथों 6 मिलियन मारे गए यहूदियों और लाखों लोगों की याद को अपमानित करता है। अगर फिल्म निर्माता का लक्ष्य कथित तौर पर किसी की मौत पर फिल्म बनाकर पीआर हासिल करना था, तो वह सफल हो गए हैं।’

एम्बेसी की तरफ से ट्विटर पर लिखा गया, ”हालिया फिल्म ‘बवाल’ में होलोकॉस्ट के महत्व को तुच्छ बताए जाने से इजरायली दूतावास परेशान है। फिल्म में कुछ शब्दावली के उपयोग में गलत विकल्प था। हालांकि हम मानते हैं कि कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था, हम उन सभी से आग्रह करते हैं, जो होलोकॉस्ट की भयावहता के बारे में पूरी तरह से जागरूक नहीं हैं, वे इसके बारे में खुद को शिक्षित करें।” उन्होंने आगे लिखा,”हमारा दूतावास इस महत्वपूर्ण विषय पर शैक्षिक सामग्री का प्रचार-प्रसार करने के लिए लगातार काम कर रहा है और हम होलोकॉस्ट से मिलने वाली साखी की बेहतर समझ के लिए बातचीत के लिए तैयार हैं।”इंटरव्यू में नितेश तिवारी ने फिल्म पर अपनी राय रखी थी। इस फिल्म के बचाव में उन्होंने कहा था, ‘ऑश्र्वित्ज सीक्वेंस को जिस तरह से कुछ लोगों ने देखा, वह निराशजनक है। किसी भी तरह से असंवेदनशील होना मकसद नहीं था। क्या हमने ये नहीं देखा कि अज्जू और निशा ने ऑशविट्ज में जो कुछ देखा है, उससे पूरी तरह परेशान और प्रभावित हो जाते हैं? वे कैदियों को देखते हैं, वे देखते हैं कि उन्हें कैसे ढेर कर दिया गया, उन्होंने देखा हैं कि उन्हें कैसे खत्म कर दिया गया। क्या वे इसके प्रति असंवेदनशील हैं? नहीं, उनकी आंखों में आंसू आ गए।’

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