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लेफ्टिनेंट जनरल मुनीर का बने सेना प्रमुख,जाने मुनीर के बारे में

नई दिल्ली – पाकिस्तान के बीते इतिहास से सबक लेकर सुरक्षित खेलते हुए लेफ्टिनेंट जनरल असीम मुनीर (Asim Munir) को पाकिस्तान (Pakistan) का अगला सेना प्रमुख चुना है. ऐसे समय जब शहबाज शरीफ घरेलू मोर्चे पर तमाम राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, तो लेफ्टिनेंट जनरल मुनीर छह नामों में सबसे अच्छा दांव थे. 29 नवंबर को रिटायर हो रहे निवर्तमान जनरल कमर जावेद बाजवा (Qamar Javed Bajwa) के उत्तराधिकारी के रूप में वजीर-ए-आजम शहबाज शरीफ के पास वरिष्ठता क्रम के आधार पर आधा दर्जन नाम भेजे गए थे.

जिसमें एक 3 साल का सेवा विस्तार भी शामिल है. लेफ्टिनेंट जनरल असीम मुनीर वर्तमान में जीएचक्यू में क्वार्टर मास्टर जनरल हैं. उन्हें जनरल बाजवा का करीबी बताया जाता है. एक ब्रिगेडियर के रूप में, वह उस समय फोर्स कमांड नॉर्दर्न एरियाज़ (FCNA) में एक कमांडर थे, जब बाजवा एक्स कॉर्प्स के कमांडर थे.

एफसीएनए एक्स कॉर्प्स की कमान के अंतर्गत आता है.लेफ्टिनेंट जनरल मुनीर ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल, मंगला से ग्रेजुएट हैं, और 2 सितारा जनरलों की वर्तमान पीढ़ी में सबसे वरिष्ठ हैं, जो सभी पाकिस्तान सैन्य अकादमी, एबटाबाद के एक ही बैच से हैं. हर लिहाज से मुनीर एक ‘उत्कृष्ट सैन्य अधिकारी’ हैं और हाल ही में पाकिस्तानी सेना की आंतरिक भूमिका के विस्तृत विवरण पर आधारित किताब ‘क्रॉस्ड स्वॉर्ड्स’ (Crossed Swords) के लेखक शुजा नवाज ने उन्हें ‘ए स्ट्रेट एरो’ (A Straight Arrow) बताया था.

इमरान खान के लिए असीम मुनीर का नाम सेना के छह वरिष्ठ अधिकारियों की सूची में संभवतः सबसे अंतिम होता, जिसे वह अगले सेना प्रमुख बतौर देखना पसंद करते. 2019 में इमरान खान ने आईएसआई के डीजी के रूप में मुनीर के कार्यकाल के पर कतर दिए थे. इस पद पर नियुक्त होने के बमुश्किल आठ महीने बाद बाजवा पर दबाव बनाकर मुनीर को हटाने में सफल होने के बाद इमरान खान इस पद पर अपने विश्वस्त फैज हामिद को लाए थे. मुनीर को निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल बाजवा का करीबी माना जाता है, क्योंकि वह पहले सेना में उनके अधीन काम कर चुके हैं. इस वजह से भी इमरान खान मुनीर को लेकर असहज हैं, क्योंकि बाजवा से भी उनकी ठन चुकी है.

इस झटके के बाद इमरान खान को सत्ता में वापसी के लिए 2023 के उत्तरार्ध में होने वाले अगले चुनावों का इंतजार करना होगा. यही वह पेंच है जहां मुनीर फैक्टर सबसे ज्यादा मायने रखता है. असीम मुनीर की राजनीतिक संबद्धता के बारे में कुछ ज्यादा कहने-सुनने को नहीं है. हालांकि सामरिक विश्लेषकों को संदेह है पाकिस्तान की राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करने के निवर्तमान प्रमुख बाजवा की हलफ की पाकिस्तान सेना आगे भी लाज रखेगी. इमरान खान खुद राजनीति में सेना के दखल के फायदे उठाते आए हैं. पाकिस्तान की राजनीतिक विश्लेषक ज़ाहिद हुसैन कहते हैं, ‘यह पाकिस्तान सैन्य प्रतिष्ठान का ही निर्णय रहा जो इमरान राजनीति के ऊंचाइयों तक पहुंच सके. अब यह कोई छिपी बात नहीं है।

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