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मोहन भागवत ने जनसंख्‍या विस्‍फोट भारत के लिए बड़ी चुनौती -जाने क्यों ?

नई दिल्ली – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने देश में महिला सशक्तिकरण की पुरजोर वकालत की है और कहा है कि पुरुष और महिला हर पहलू और सम्मान में समान हैं, उनमें समान क्षमताएं हैं। भारत में जनसंख्या पर एक समग्र नीति बनाई जानी चाहिए जो सब पर समान रूप से लागू हो और किसी को इससे छूट नहीं मिले। भारत में तेजी से बढ़ती जनसंख्‍या को समस्‍याओं की बड़ी वजहों में से एक माना जाता रहा है। समय-समय पर संस्‍थाएं एवं विश्‍लेषक इस ओर इशारा करते रहे हैं। भारत के लिए जनसंख्‍या विस्‍फोट क्‍यों बड़ी चुनौती है।

महिलाओं के सशक्तिकरण की शुरुआत घर से होनी चाहिए और उन्हें समाज में उनका उचित स्थान मिलना चाहिए। भागवत ने भारत के एक बार फिर विश्वगुरु (विश्व नेता) बनने के सपने को साकार करने में महिलाओं की भूमिका के महत्व को रेखांकित किया। हम विश्वगुरु भारत का निर्माण करना चाहते हैं तो महिलाओं की समान भागीदारी भी जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाए जाने और दो बच्चों की नीति लागू करने की मांग वाली याचिका दाखिल गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अनिच्छा जताई थी। याचिका में दलील दी गई थी कि देश में जनसंख्या विस्फोट कई समस्‍याओं की जड़ है, लेकिन सर्वोच्‍च अदालत का कहना था कि कोई भी समाज शून्य समस्या वाला नहीं हो सकता है।

आरएसएस प्रमुख महिला सशक्तिकरण पर अपने मुख्य अतिथि पद्मश्री संतोष यादव के सामने बोल रहे थे, जो एक प्रशंसित पर्वतारोही हैं, जिन्हें विजयादशमी समारोह के लिए आमंत्रित किया गया था, यह पहली बार नहीं था कि आरएसएस के समारोह में एक महिला को आमंत्रित किया गया था, अनुभवी कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अमृता कौर और नागपुर से पहली लोकसभा सदस्य अनुसुबाई काले और अन्य को भी आरएसएस के कार्यक्रमों में आमंत्रित किया गया था।

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