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Quad Summit के दौरान जापान के करीब पहुंचे चीन और रूस के युद्धक विमान

बीजिंग – जापान में एक तरफ मंगलवार को क्वाड समिट का आयोजन चल रहा था तो वहीं रूस और चीन ने उस दौरान युद्ध अभ्यास कर हलचलें तेज कर दीं। रूस के विदेश मंत्री ने मंगलवार को बताया कि उनकी और चीन की सेना ने 13 घंटे तक युद्धाभ्यास किया। यह संयुक्त पेट्रोलिंग जापानी समुद्र और पूर्वी चीन समुद्र में की गई। इसमें रूस के TU-95 बॉम्बर्स और चीन के Xian H-6 जेट्स ने हिस्सा लिया।

इस युद्धाभ्यास पर तीखा रिएक्शन देते हुए जापान ने उकसावे की कार्रवाई बताया है तो अमेरिका ने कहा कि इससे पता चलता है कि रूस और चीन एक दूसरे के कितना करीब आ चुके हैं। रूसी और चीनी सेना के विमानों को अपनी सीमा के पास उड़ता देख दक्षिण कोरिया और जापान के विमानों ने भी उड़ान भरी और निगरानी की। जापान के डिफेंस मिनिस्टर नोबुओ किशी ने कहा कि चीन और रूस के युद्धक विमानों को अपनी हवाई सीमा के पास देख हमने अपने विमानों को तैनात किया था। यह उस वक्त हुआ, जब टोक्यो में क्वाड देशों की समिट चल रही थी। किशी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि टोक्यो ने कूटनीतिक चैनल से इस मसले को लेकर रूस और चीन से अपना विरोध जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से साफ है कि रूस और चीन ने यह सब जानबूझकर ऐसे वक्त में किया है, जब टोक्यो में पीएम नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति जो बाइडेन, ऑस्ट्रेलिया के नए चुने गए नेता एंथनी अल्बनीज मीटिंग कर रहे थे।

जापान ने कहा कि हमारा मानना है यह उकसावे वाली कार्रवाई है। विदेश मंत्री ने कहा कि बीते साल नवंबर के बाद से अब तक यह चौथी घटना है। इस बीच चीन के रक्षा मंत्रालय ने जापानी समुद्र और ईस्ट चाइना सी में संयुक्त एयर पेट्रोल की पुष्टि की है। चीन ने कहा कि यह सालाना युद्धाभ्यास था। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि फरवरी में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद दोनों देशों के बीच यह पहली मिलिट्री ड्रिल थी। लेकिन इसके लिए ऐसा वक्त चुना गया, जब बाइडेन जापान के दौरे पर थे।

यही नहीं कहा जा रहा है कि रूस और चीन के युद्धक विमान जापानी समुद्र में उड़ते हुए कोरिया एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन में पहुंच गए थे। सियोल स्थित सैन्य अधिकारी ने कहा कि रूस और चीन की ओर से इस संबंध में हमें पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। गौरतलब है कि अमेरिका, जापान, भारत, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों की मीटिंग क्वाड में चल रही थी। ऐसे में इस युद्धाभ्यास को सीधे तौर पर एक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।

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