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बिजली संकट: गृहमंत्री शाह ने की ऊर्जा कोयले और रेल मंत्री के साथ बैठक, कोयले की उपलब्धता और आपूर्ति पर हुई चर्चा

नई दिल्ली: देश में तपिश के साथ बढ़ रहे बिजली संकट से निपटने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को रेल, ऊर्जा और कोयला मंत्री के साथ अपने आवास पर उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में इन सभी मंत्रालयों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में कोयले की उपलब्धता, आपूर्ति की स्थिति के साथ सभी बड़े ताप विद्युत संयंत्रों की स्थिति की समीक्षा की गई।

गौरतलब है कि बिजली की रिकॉर्ड मांग के बीच शाह ने इससे पहले 20 अप्रैल को इन तीनों मंत्रियों के साथ बैठक की थी। बैठक में कोयला उत्पादन, आपूर्ति का रोडमैप तैयार किया गया था। सोमवार की बैठक में एक बार फिर से स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में कोयला मंत्री ने कोयले की उपलब्धता, रेल मंत्री ने कोयला आपूर्ति के लिए किए जा रहे प्रयास और ऊर्जा मंत्री ने राज्यवार बिजली संकट की जानकारी दी।

बैठक में उपस्थित एक अधिकारी के मुताबिक, बैठक में कोयला उत्पादन, विदेश से आयात की संभावना और उपलब्ध कोयले की ताप विद्युत संयंत्रों में समय रहते आपूर्ति पर गहन चर्चा के बाद रोडमैप तैयार किया गया। सभी बड़े प्लांट की ताजा स्थिति और उनकी जरूरतों का आकलन किया गया। तय किया गया कि जिन प्लांट में स्टॉक कम है, वहां कोयला आपूर्ति मामले में प्राथमिकता दी जाए। कोयले की आपूर्ति के लिए सड़क मार्ग के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी विचार हुआ।

बैठक में राज्यों की ताप विद्युत संयंत्रों पर 1.5 लाख करोड़ रुपये की देनदारी पर भी चर्चा हुई। ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने बीते दिनों संबंधित राज्यों से देनदारी खत्म करने की अपील की थी। अब नए सिरे से राज्यों से देनदानी खत्म करने के साथ विदेश से कोयला आयात करने का ऑर्डर देने के लिए कहा जाएगा।

बढ़ी तपिश के बीच बीते अप्रैल महीने में बिजली की रिकॉडतोड़ मांग ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। बीते महीने के अंतिम सप्ताह में बिजली की मांग ने प्रतिदिन नया कीर्तिमान बनाया। इस दौरान प्रतिदिन 200 गीगावाट से ज्यादा की मांग रही। गर्मी से राहत के आसार नहीं होने के कारण मई और जून महीने में मांग में और बढ़ोत्तरी की संभावना है। समस्या यह है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमत पर हुई जबर्दस्त बढ़ोत्तरी के कारण आयात आधारित थर्मल पावर प्लांट कोयला खरीदने से बच रहे हैं। ये प्लांट राज्यों पर भारी बकाए का सवाल उठा रहे हैं।

कोयले की कमी के कारण झारखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा सहित 16 राज्यों में बिजली संकट है। देश के कोयला खदानों के मुहाने पर स्थित पिथेड संयंत्रों में से 18 फीसदी के पास जरूरत के हिसाब से सिर्फ 78 फीसदी कोयला है। जबकि कोयला खदानों से दूर 147 बिजली संयंत्रों के पास उनकी जरूरत के कोयले की मात्रा का केवल 25 फीसदी है। सौ फीसदी स्टॉक रहने पर पिथेड प्लांट 17 तो नॉन पिथेड प्लांट 26 दिनों तक चल सकते हैं। इस समय देश के कुल 173 बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार निर्धारित मानदंडों के 25 फीसदी से कम हैं।

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