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भारत

अफगान संकट पर गुरु ग्रंथ साहिब को सिर पर रख कर लाए, प्रकाश पर्व पर बोले पीएम मोदी

नई दिल्ली: गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व पर देश के किसी प्रधानमंत्री ने पहली बार सूर्यास्त के बाद लालकिले से देश को संबोधित किया। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कई बातों का उल्लेख किया। सिखों के पावन पर्व के मौके पर पीएम मोदी ने अफगानिस्तान संकट से लेकर ओरंगजेब काल तक का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि अफगानिस्तान में संकट के वक्त हम गुरु ग्रंथ साहिब को सिर पर रखकर लाए और सिखों की रक्षा की। इस मौके पर पीएम मोदी ने 400 रुपए का विशेष सिक्का जारी किया

21 अप्रैल को गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व पर पीएम मोदी ने लालकिले से देश को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि मुझे खुशी है कि आज हमारा देश अपने गुरुओं के आदर्शों पर पूरी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रहा है। इस पुण्य अवसर पर मैं सभी दस गुरुओं के चरणों में नतमस्तक हूं। प्रकाश पर्व के अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जब अफगानिस्तान में संकट आया तो हम गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप को शीश पर रखकर लेकर आए और सिख भाइयों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि लालकिला कितने कालखंडो का साक्षी रहा है। इस किले ने गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को भी देखा और देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देने वालों के हौसलों को भी परखा है। ये भारतभूमि सिर्फ एक देश नहीं है, बल्कि हमारी महान विरासत है, महान परंपरा है।

पीएम मोदी ने कहा कि औरंगजेब की अत्याचारी सोच के सामने गुरु तेग बहादुर ‘हिन्द दी चादर’ बन गए थे और चट्टान की तरह खड़े हो गए थे। यह लाल किला गवाह है कि औरंगजेब ने भले ही कई सिर काट दिए, लेकिन हमारे विश्वास को नहीं हिला सका। संबोधन के दौरान पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि एक समय देश में मजहबी कट्टरता की आंधी आ गई थी, तब गुरु तेग बहादुर ने आगे आकर सभी को सही राह दिखाई थी। वे मजहबी कट्टरता की आंधी में चट्टान की तरह डटे रहे।

पीएम मोदी ने 400 रुपए का विशेष सिक्का और डाक टिकट जारी किया। प्रकाश पर्व पर पीएम मोदी ने शबद कीर्तन भी सुना। अपने संबोधन में पीएम ने कहा कि शबद कीर्तन सुनकर जो आनंद मिला है, उसकी अभिव्यक्ति मैं नहीं कर सकता।

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