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पूर्वी यूक्रेन के सैकड़ों ठिकानों पर रूसी हमला

यूक्रेन: रूसी सेना ने मंगलवार रात पूर्वी यूक्रेन में सैकड़ों ठिकानों पर हमला करने का दावा किया है. इधर रूसी चेतावनी के बावजूद मारियोपोल के स्टील प्लांट में घिरे सैनिकों में किसी ने समर्पण नहीं किया है. यहां आम लोग भी फंसे हैं.मंगलवार की रात रूसी सेना के हवाई हमले में यूक्रेन के 73 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है. रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेंकोव ने बुधवार को यह जानकारी दी. प्रवक्ता ने बताया, “नोवोवोरोन्त्सोवका ओर किसेलिव्का इलाके में बेहद सटीक मिसाइलों से हमले के नतीजे में 40 यूक्रेनी सैनिक और सात बख्तरबंद गाड़ियां खत्म हो गईं” स्वतंत्र स्रोतों से इस जानकारी को पुष्ट नहीं किया जा सका है. कोनाशेंकोव ने नियमित ब्रीफिंग के दौरान कहा कि हवाई हमलों के अलावा रूसी मिसाइलों ओर तोपों के हमले में 1,053 सैन्य चीजों को निशाना बनाया गया है. रूसी प्रवक्ता ने इस दौरान जमीनी हमलों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. कोनाशेंकोव ने कब्जे में आये इलाकों के बारे में भी कोई ब्यौरा नहीं दिया. केमिन्ना में कामयाबी तोप के गोलों और रॉकेटों की बौछार के साये में हजारों रूसी सैनिकों का दस्ता पूर्वी यूक्रेन के डोनबास इलाके में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है. अलगाववादियों की सक्रियता वाले इलाकों पर रूस पूरी तरह से नियंत्रण करने की कोशिश में है. हालांकि अब तक कोई भी प्रमुख शहर या इलाका रूसी कब्जे में नहीं आया है. यह भी पढ़ेंः पूर्वी यूक्रेन में रूसी हमले का नया दौर शुरू रूस को उम्मीद है कि यूक्रेनी सैनिकों के मुकाबले बड़ी मारक क्षमता का फायदा उसे कीव से ज्यादा पूर्वी यूक्रेन में मिल सकता है. कीव पर कब्जे के लिए निकले विशाल रूसी दस्ते की सप्लाई लाइन पर यूक्रेनी सेना ने छोटे-छोटे टुकड़ों में कई बार हमला कर उसे नुकसान पहुंचाया. हाल ही में यूक्रेनी सेना ने पूर्वी शहर खारकीव के पास भी रूसी सप्लाई लाइन पर हमला किया था. रूसी सैनिकों ने सीमावर्ती इलाके में करीब 18000 लोगों की रिहाइश वाले क्रेमिन्ना पर मंगलवार को कब्जा करने में कामयाबी पाई है. रूसी सेना खारकीव के पास हमले कर रही है जो यूक्रेन का दूसरा सबसे बड़ा शहर है.

खारकीव के भीतर मिसाइल हमले में मंगलवार को कम से कम चार लोगों की मौत हुई है. समर्पण के लिए एक और समय सीमा रूस ने पूर्वी यूक्रेन के मारियोपोल में एक स्टील प्लांट के अंदर घिरे सैनिकों को समर्पण करने के लिए एक और समयसीमा दी है. मलबे के ढेर में तब्दील हो चुके मारियोपोल में यूक्रेनी सेना के आखिरी दुर्ग अजोव्स्ताल स्टील प्लांट पर रूसी सेना ने घेरा डाल रखा है. यूक्रेनी सैनिकों को एक बार फिर समर्पण के लिए बुधवार दोपहर तक समय दिया गया है हालांकि यूक्रेनी सेना अब तक इसे नजरअंदाज ही करती आई है. स्टील प्लांट में बच्चों समेत बहुत सारे आम लोग भी हैं. मंगलवार को भी चेतावनी देते हुए समर्पण के लिए दोपहर तक का समय दिया गया था लेकिन एक भी सैनिक ने हथियार नहीं डाले. अब यह समय बुधवार दोपहर तक के लिए तय किया गया है. स्टील प्लांट की घेरबंदी में फंसे यूक्रेन के अजोव बटालियन की तरफ से एक वीडियो जारी किया गया है. इस वीडियो में दिखाया है कि स्टील प्लांट के अंदर बड़ी संख्या में औरतें, बच्चे और बुजुर्ग भी हैं. यहां की सप्लाई खत्म हो रही है. वीडियो में एक महिला कह रही है, “हमने अपना घर खोया, रोजगार खोया, हम बस शांति से सामान्य जिंदगी जीना चाहते हैं. यहां बहुत सारे बच्चे हैं, वो भूखे हैं हमें यहां से निकालिए” यह वीडियो कब शूट किया गया है इसका जानकारी पुष्ट नहीं हो सकी है. यह भी पढ़ेंः रूसी मिसाइलों का निशाना बना लवीव यूक्रेन ने कहा है कि वह कभी समर्पण नहीं करेगा और उसकी सेना का कहना है कि स्टील प्लांट के पास लड़ाई जारी है. यूक्रेन ने बुधवार को मारियोपोल से 6, 000 आम लोगों को निकालने के लिए 90 बसें भेजने की योजना का एलान किया. यूक्रेन का कहना है कि इसके लिए रूसी सेना के साथ मानवीय गलियारे पर शुरुआती सहमति बनी है. हालांकि इससे पहले रूस ने बसों के काफिले और यहां तक कि रेडक्रॉस के सहायता दल को भी यहां नहीं आने दिया.

आम लोग अपनी गाड़ियों से जरूर यूक्रेन के दूसरे हिस्से तक पहुंचने में सफल हुए हैं.हालांकि दसियों हजार लोगों को बस में बिठा कर रूस अपने देश में ले गया है. रूस इसे मानवीय कदम बताता है जबकि यूक्रेन इसे अवैध रूप से लोगों को जबरन निकालने की संज्ञा दी है. 50 लाख से ज्यादा शरणार्थी यूक्रेन युद्ध अब आठवें हफ्ते में प्रवेश करने वाला है इस दौरान 50 लाख से ज्यादा यूक्रेन के लोग देश के बाहर जाने पर मजबूर हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी ने बुधवार को यह जानकारी दी. 30 मार्च को यह संख्या चालीस लाख के पार गई थी. युद्ध के पहले यूक्रेन की आबादी 4.4 करोड़ थी. यूएनएचसीआर का कहना है कि इस युद्ध के कारण 70 लाख से ज्यादा लोग अपने ही देश में विस्थापित हुए हैं. एजेंसी के मुताबिक फिलाहल युद्ध से प्रभावित इलाकों में देश के 1.3 करोड़ आम लोग घिरे हुए हैं. इस बीच कुछ लोगों ने राजधानी कीव और आस पास के इलाकों में वापसी भी की है. मलबों में तब्दील घरों को लोग फिर से संवारने में जुट गये हैं. यूक्रेन को अंतरराष्ट्रीय मदद यूरोपीय काउंसिल के प्रमुख चार्ल्स मिशेल बुधवार को कीव आए हैं. बीते दिनों में कई यूरोपीय अधिकारियों और नेताओं ने यूक्रेन के साथ समर्थन दिखाने के लिए कीव की यात्रा की है. इस बीच पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को सैन्य सहायता बढ़ाने का भरोसा दिया है. अमेरिका का कहना है कि रूस के खिलाफ नए प्रतिबंध तैयार किए जा रहे हैं.

आने वाले दिनों मे अमेरिकी राष्ट्रपति यूक्रेन के लिए नये सैन्य सहायता पैकेज का एलान कर सकते हैं. इसका स्वरूप पिछले हफ्ते के 80 करोड़ डॉलर के पैकेज जैसा ही होने की उम्मीद है. इस बीच जापान ने रूस को दिया मोस्ट फेवर्ड नेश का दर्जा खत्म कर दिया है. बीते दिनों में जापान ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों समेत कई कदम उठाए हैं. अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा ने कहा है कि वे यूक्रेन को और ज्यादा तोप देंगे. जबकि नॉर्वे का कहना है कि उसने 100 मिस्त्राल एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम यूक्रेन भेजे हैं. नॉर्वे की संसद को संबोधित करते हुए यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हथियारों की मांग की थी. यह मिसाइल सिस्टम 1980 के दशक में तैयार किया गया था. जमीन से हवा में मार करने वाले इस एयर डिफेंस सिस्टम को गाड़ियों, शिपों, हैलिकॉप्टरों पर इस्तेमाल किया जा सकता है. यह आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है. मोल्दोवा को धमकी रूसी नेताओं ने पूर्व सोवियत संघ के देश मोल्दोवा में रूस समर्थित युद्ध के प्रतीक चिन्ह को प्रतिबंधित करने पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है. रूसी सीनेटर आलेक्सी पुश्कोव ने कहा है मोल्दोवा के राष्ट्रपति को धमकी दी है कि उनका देश “इतिहास के कूड़ेदान” में पहुंच सकता है. पुश्कोव ने अपने टेलिग्राम चैनल पर लिखा है, “उन्हें रूस और उसके प्रतीकों के प्रति ज्यादा सावधान रहना चाहिए क्योंकि वो रूसी गैस की कीमत नहीं दे सकते” यूक्रेन और रोमानिया के बीच बसा मोल्दोवा यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद यूरोपीय संघ की सदस्यता लेना चाहता है. मोल्दोवा ने यूक्रेन को मानवीय सहायता दी है लेकिन सैन्य सहायता नहीं. उसने खुद को तटस्थ घोषित किया है और रूस पर प्रतिबंध नहीं लगाए हैं.

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