बिजनेसविश्व

कॉरपोरेट वर्ल्ड और विश्व के दो बड़े बिजनेसमैन के बीच कानूनी लड़ाई की शतरंज

मुंबई – भारत में रिटेल क्षेत्र में सबसे बड़ी तेजी आयी है इस बात में कोई शंका की बात नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के रिटेल बिजनस के 2025 तक 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। जिसके चलते कई रिटेल कंपनियों को बीच जंग छिड़ी हुयी रहेगी।

रिटेल बिजनस पर कब्जे को लेकर दुनिया के दो अमीरों जेफ बेजोस और मुकेश अंबानी के बीच जबरदस्त जंग छिड़ी हुई है। दुनिया के दो सबसे अमीर कारोबारी एक दूसरे के सामने है। सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, एनसीएलटी, एनसीएलएटी, सीसीआई और मध्यस्थता पंचाट में रिलायंस और ऐमजॉन के बीच जंग जारी है। कोई भी पक्ष घुटने टेकने को तैयार नहीं है। दुनियाभर के निवेशकों की नजर भी इस जंग के नतीजों पर लगी हुई है। इस जंग की वजह से कई निवेशकों को लाभ भी मिल सकता है। वे उत्सुकता इस बात को लेकर है विदेशी मध्यस्थता पंचाटों के आपात फैसले भारत में वैलिड होते हैं या नहीं। इससे विदेशी निवेशकों को भारत में किए गए एग्रीमेंट्स की वैलिडिटी को भी जांचने का मौका मिलेगा।

दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों के बीच तकरार की वजह हैं किशोर बियानी और उनका फ़्यूचर ग्रुप। मुकेश अंबानी के लिए ये डील इस वजह से अहम है कि तकरीबन 11 हजार स्टोर्स और एक लाख 30 हजार करोड़ रुपये की सालाना बिक्री वाली रिलायंस रिटेल अब देश की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी है। फ़्यूचर ग्रुप के साथ यह सौदा उसे 1700 स्टोर और क़रीब 20 हजार करोड़ की आमदनी और देगा। ऐमज़ॉन के जेफ बेजोस को ये कतई गंवारा नहीं है कि भारत के बाजार पर रिलायंस का एकाधिकार हो जाए।

बेजोस की ई-कॉमर्स कंपनी ऐमजॉन ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और फ्यूचर ग्रुप की डील को रोकने के लिए अपनी पूरी जान लगा रखी है। दोनों पक्षों के बीच 2019 से कानूनी जंग चल रही है। दरअसल यह पूरी लड़ाई देश के रिटेल बिजनस पर कब्जे को लेकर है। दोनों कंपनियों के लिए किशोर बियाणी की फ्यूचर रिटेल की अहम भूमिका है। कंपनी के देश के 400 से अधिक शहरों में 1,800 रिटेल स्टोर है। यही वजह है कि ऐमजॉन और रिलायंस इसे अपने पाले में करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम के मुताबिक 2030 तक भारत, अमरीका और चीन के बाद दुनिया का सबसे बड़ा रिटेल बाजार हो जाएगा। फिलहाल देश के रिटेल कारोबार का आकार करीब 70 हजार करोड़ डॉलर है। इसके 10 साल में बढ़कर क़रीब 1.3 लाख डॉलर हो जाने का उम्मीद है। दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन रिटेलर ऐमज़ॉन इस बाजार का बड़ा हिस्सा अपनी झोली में देखना चाहता है। इसी वजह से फ़्यूचर ग्रुप के साथ बेजोस ने सौदा किया। साल 2019 के अगस्त में ऐमज़ॉन ने फ़्यूचर ग्रुप की कंपनी फ़्यूचर कूपन्स लिमिटेड में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी।

देश की जानी मानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA ने फ्यूचर ग्रुप को निगेटिव रेटिंग दे दी। ऐसे समय में बियाणी ने Future Coupons में 49 फीसदी हिस्सेदारी ऐमजॉन को 1500 करोड़ रुपये में बेच दी। नवंबर 2019 में इसे भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग से भी हरी झंडी मिल गई। 2020 में कोरोना ने फ्यूचर ग्रुप की हालत और खस्ता कर दी। अप्रैल 2020 तक फ्यूचर रिटेल की बिक्री सामान्य स्तर से 75 फीसदी गिर गई और कंपनी भारी दबाव में आ गई। उसी साल अगस्त में बियाणी ने अपने रिटेल, होलसेल, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग बिजनस को बेचने के लिए रिलायंस रिटेल के साथ 24,713 करोड़ रुपये की एक डील की। ऐमजॉन ने इसे सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत में चुनौती दी।

मध्यस्थता पंचाट ने 25 अक्टूबर 2020 को ऐमजॉन के पक्ष में अंतरिम फैसला देते हुए फ्यूचर-रिलायंस डील पर रोक लगा दी। इसके बाद ऐमजॉन ने इस डील को रोकने लिए सेबी, सीसीआई और स्टॉक एक्चेंजेज को भी चिट्टी लिख दी। फ्यूचर ग्रुप ने इसके खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अभी कोर्ट में दलीलें चल रहीं थी कि 20 नवंबर, 2020 को सीसीआई ने रिलायंस-फ्यूचर डील को हरी झंडी दे दी। दिसंबर 2020 में दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल जज बेंच ने फ्यूचर रिटेल को कोई राहत नहीं दी लेकिन साथ ही कहा कि रिलायंस के साथ डील को मंजूरी देकर फ्यूचर रिटेल ने कुछ गलत नहीं किया है। ऐमजॉन ने जनवरी 2021 में इसे डिविजन बेंच में चुनौती दी। इस बीच 20 जनवरी, 2021 को सेबी ने भी रिलायंस-फ्यूचर डील को क्लीयर कर दिया। ऐमजॉन ने मध्यस्थता पंचाट के फैसले को लागू कराने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

रिलायंस के साथ डील पर अंतरिम रोक हटाने के लिए फ्यूचर ने मध्यस्थता अदालत में याचिका लगाई थी लेकिन 21 अक्टूबर, 2021 को इसे खारिज कर दिया गया। फ्यूचर रिटेल ने फिर दिल्ली हाई कोर्ट में गुहार लगाई। हाई कोर्ट ने 29 अक्टूबर को मध्यस्थता अदालत के अंतरिम आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। 8 नवंबर को फ्यूचर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए शेयरहोल्डर्स और क्रेडिटर्स की मीटिंग बुलाने की अनुमति मांगी। ऐमजॉन ने भी सुप्रीम कोर्ट में ताजा याचिका दायर करते हुए अंतिम फैसला आने तक फ्यूचर-रिलायंस डील पर किसी तरह के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। 11 नवंबर, 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने फ्यूचर और एमेजॉान की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए। 17 दिसंबर को इस मामले में एक और मोड़ आया जब सीसीआई ने फ्यूचर कूपंस में ऐमजॉन के निवेश को दी गई मंजूरी को निलंबित कर दिया। सीसीआई ने कहा कि ऐमजॉन ने इस मामले में कमीशन को गुमराह किया था। जिसके बाद ऐमजॉन ने सीसीआई के ऑर्डर के खिलाफ एनसीएलएटी का दरवाजा खटखटाया जो इस हफ्ते इस पर सुनवाई कर सकती है।

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