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भारत में 10 डिजिट और चीन में 11 डिजिट का ही मोबाइल नंबर क्यों होते है?

मुंबई – आज हर किसी छोटे से लेकर बड़े व्यक्ति के पास मोबाइल फ़ोन जरूर होगा। भारत में मोबाइल नंबर 10 अंको का होता है। इसमें ना एक नंबर ज्यादा होता और ना ही एक नंबर कम होता है। हम जब भी किसी को फोन मिलाते है तो उससे पहले नंबर का वेरिफिकेशन करते है और जांचते है कि नंबर 10 अंकों का है या नहीं? अगर कभी गलती से आप 9 या 11 डिजिट का नंबर डायल कर दें, तो फोन नहीं लगता। जबकि दुनिया के बाकी मुल्कों जैसे चीन में मोबाइल नंबर 11 अंकों का होता है। आखिर ऐसा क्यों?

मोबाइल नंबर के सभी अंकों का अपना मतलब होता है। ऐसे ही मोबाइल नंबर किसी को नहीं बांट दिया जाता है। इसका प्रोसेस तीन चरणों का है। 10 अंकों का मोबाइल नंबर तीन हिस्सों में बंटा होता है। पहली दो डिजिट को “एक्सेस कोड (AC) कहा जाता है। इसके बाद की तीन डिजिट कोड को प्रोवाइडर कोड (PC) कहा जाता है। जबकि आखिरी की 5 डिजिट सब्सक्राइबर्स कोड (SC) होती है।

मोबाइल नंबर के 10 अंकों के होने के पीछे की वजह जनसंख्या है। दरअसल मोबाइल नंबर में 10 अंक होने की वजह से करीब 1000 करोड़ यूनीक मोबाइल नंबर तैयार किए जा सकते है, जो कि हमारे देश की 1 अरब 36 करोड़ आबादी के लिए पर्याप्त है। लेकिन मौजूदा वक्त में लोग एक से ज्यादा मोबाइल नंबर रखते हैं साथ ही देश की आबादी में इजाफा हो रहा है। ऐसे में पिछले कुछ वर्षों में नए मोबाइल नंबर की जरूरत होगी। यही वजह है कई मौकों पर मोबाइल नंबर को 12 या फिर 13 डिजट का करने का प्रस्ताव रखा गया है।

लेकिन चीन में मोबाइल नंबर से पहले अतिरिक्त सिटी कोड 0 डॉयल करना होता होता है, जो कि कंट्री कोड (+86) से अलग होता है। यही वजह है कि चीन में 11 अंकों का मोबाइल नंबर होता है। चीन की तरह यूके में भी एरिया कोड की वजह से 11 अंकों का मोबाइल नंबर होता है।

भारत में 10 अंकों का मोबाइल नंबर होने के पीछे सरकार की राष्ट्रीय नंबरिंग योजना यानी NNP है। यदि मोबाइल नंबर एक डिजिट का होगा तो 0 से 9 तक केवल 10 अलग-अलग नंबर ही बन सकेंगे। जिसके बाद केवल कुल 10 नंबर बनेंगे और कुल 10 लोग ही इनका उपयोग कर सकेंगे। वहीं 2 अंकों का मोबाइल नंबर होने पर भी केवल 0 से 99 तक 100 नंबर ही बन सकेंगे और केवल 100 लोग ही इनका इस्तेमाल कर पाएंगे।

साल 2003 तक देश में 9 डिजिट के ही मोबाइल नंबर होते थे. लेकिन बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए TRAI ने इसे बढ़ा कर 10 अंकों का कर दिया। 15 जनवरी 2021 से भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने लैंडलाइन से फोन लगाने पर नंबर के आगे शून्य लगाने का निर्देश दिया है। डायल करने के तरीके में इस बदलाव से दूरसंचार कंपनियों को मोबाइल सेवाओं के लिए 254.4 करोड़ अतिरिक्त नंबर तैयार करने की सुविधा मिलेगी।

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