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जानिये संविधान दिवस का इतिहास और महत्व

नई दिल्ली – हर साल 26 दिसंबर 2021 को पूरे देश में संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज ही के दिन भारतीय संविधान को संविधान सभा द्वारा औपचारिक रूप से अपनाया गया था। संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अपनाया था। जो 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ।

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की 125वीं जन्म-दिवस के अवसर पर वर्ष 2015 में 26 नवंबर को संविधान दिवस के तौर पर मनाये जाने की घोषणा की थी। तब से हर वर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने नागरिकों के बीच संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए इस दिन को ‘संविधान दिवस’ के रूप में मनाने के भारत सरकार के फैसले को अधिसूचित किया था। डॉ बी आर अम्बेडकर को भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार के रूप में माना जाता है। उन्हें भारत के संविधान के पिता के रूप में भी जाना जाता है।

संविधान दिवस के अवसर पर हमें न सिर्फ स्वतंत्र भारत का नागरिक होने की अहसास होता है बल्कि संविधान में उल्लिखित मौलिक अधिकारों से हमें अपना हक मिलता है और साथ ही लिखित मूल कर्तव्यों से हमें नागरिक के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों की भी याद दिलाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा, “कोई भी संविधान चाहे वह कितना ही सुंदर, सुव्यवस्थित और सुदृढ़ क्यों न बनाया गया हो, यदि उसे चलाने वाले देश के सच्चे, निस्पृह, निस्वार्थ सेवक न हों तो संविधान कुछ नहीं कर सकता। डॉ. राजेंद्र प्रसाद की यह भावना पथ-प्रदर्शक की तरह है।” इसके साथ ही पीएम मोदी ने पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा हस्ताक्षरित संविधान पत्र को भी साझा किया।

बता दे की भारत के संविधान का मसौदा दिसंबर 1946 और दिसंबर 1949 के सबसे चुनौतीपूर्ण अवधि के बीच तैयार किया गया था। यह वह समय था जब धार्मिक दंगे, जातिगत युद्ध और गहरी लैंगिक असमानता देश के सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरा थे। इसका मसौदा संविधान सभा द्वारा तैयार किया गया था, जिसे प्रांतीय विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुना गया था। 389 सदस्यीय संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत के लिए संविधान का मसौदा तैयार करने के अपने ऐतिहासिक कार्य को पूरा करने में दो साल, ग्यारह महीने और सत्रह दिन का समय लिया। इस अवधि के दौरान, इसने कुल 165 दिनों को कवर करते हुए 11 सत्र आयोजित किए। इनमें से 114 दिन संविधान के मसौदे पर विचार करने में व्यतीत हुए। 29 अगस्त, 1947 को संविधान सभा ने भारत के लिए एक मसौदा संविधान तैयार करने के लिए डॉ बीआर अंबेडकर की अध्यक्षता में एक मसौदा समिति का गठन किया।

भारत का संविधान मौलिक राजनीतिक सिद्धांतों को परिभाषित करने वाले ढांचे को निर्धारित करता है, सरकारी संस्थानों की संरचना, प्रक्रियाओं, शक्तियों और कर्तव्यों को स्थापित करता है और मौलिक अधिकारों, निर्देशक सिद्धांतों और नागरिकों के कर्तव्यों को निर्धारित करता है। इसे न तो प्रिंट किया गया और न ही टाइप किया गया। यह हिंदी और अंग्रेजी दोनों में हस्तलिखित और सुलेखित था। यह दुनिया के किसी भी संप्रभु देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है। बता दे की जब से भारतीय संविधान अधिनियम में आया, भारत में महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला।

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