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पाकिस्तान के फॉरेन मिनिस्टर कुरैशी बन सकते हैं पाकिस्तान के नए PM

पाकिस्तान – ISI के नए चीफ की नियुक्ति के मामले में इमरान खान और आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा के बीच तनाव जारी है। बाजवा की मुहर के 9 दिन बाद भी इमरान खान ने नए चीफ नदीम अंजुम के अपॉइंटमेंट लेटर पर दस्तखत नहीं किए। अब पाकिस्तानी मीडिया के कुछ हलकों में दावा किया जा रहा है कि अगर इमरान ने आर्मी चीफ से जोर-आजमाइश बंद नहीं की तो बहुत जल्द पाकिस्तान को शाह महमूद कुरैशी के तौर पर नया प्रधानमंत्री मिल सकता है।

शाह महमूद कुरैशी जब बाहर निकले तो मीडिया ने उन्हें घेर लिया। सवाल एक ही था- क्या आप प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं? जवाब में कुरैशी ने मुस्कराते हुए कहा- कुछ हसरतें ऐसी होती हैं, जो हसरतें ही रह जाती हैं।

एक बार फिर जब उनसे साफ जवाब देने को कहा गया तो कुरैशी ने कहा- कुछ ख्वाहिशें ऐसी होती हैं कि हर ख्वाहिश पर दम निकले। इस पर मीडिया ने फिर पूछा क्या आप अब भी इमरान खान के साथ हैं, तो इसका जवाब देने के बजाए कुरैशी तेज कदमों से चल दिए। फिर एक पत्रकार ने पूछा- हमने सुना है कि आपने नई शेरवानी सिलवा ली है? कुरैशी ने पलटकर देखा, मुस्कराए और फिर आगे चल गिए।

इमरान और आर्मी चीफ के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो चुके हैं। माना जा रहा है कि इमरान सरकार के बचे हुए डेढ़ साल के कार्यकाल के लिए कुरैशी को कुर्सी पर बिठाया जा सकता है। इसमें शेख रशीद जैसे फौज के चाटुकार मंत्री मदद कर सकते हैं। कुरैशी की इमेज भी अच्छी है और उनके दूसरी पार्टियों से भी अच्छे रिश्ते हैं। वो आसिफ अली जरदारी और बेनजीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी में रह चुके हैं। कुछ दिन पहले पाकिस्तान की संसद में बेनजीर के बेटे बिलावल ने कुरैशी पर तंज कसते हुए कहा था- इमरान को कुरैशी से सतर्क रहना चाहिए। वो पीएम बनने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

ISI के वर्तनाम चीफ हैं जनरल फैज हमीद। माना जाता है कि इमरान को इलेक्टेड की बजाए सिलेक्टेड प्राइम मिनिस्टर इन्हीं जनरल फैज की वजह से कहा जाता है। कहा जाता है कि फैज ने 2018 के चुनाव में जमकर धांधली की और इमरान को वजीर-ए-आजम बनवा दिया। शुरुआत में इमरान ने जनरल बाजवा को तीन साल का एक्सटेंशन देकर नवाजा और फैज पीछे रह गए। एक्सटेंशन के बाद आर्मी चीफ बाजवा अगले साल अक्टूबर में रिटायर हो रहे हैं। इमरान चाहते हैं कि जनरल फैज ही अगले चीफ बनें और इसके पहले वो ISI सुप्रीमो बने रहें। बाजवा इससे इत्तेफाक नहीं रखते। वे जनरल अंजुम को ISI की कमान सौंपना चाहते हैं। तनातनी की असली वजह यही है।

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