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देश को बिजली संकट से बचाने के लिए रेलवे ने उठाया बड़ा कदम

नई दिल्ली – भारत एक बार फिर बिजली संकट के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है। देश में कोयले से चलने वाले 135 पावर प्लांट में से आधे से ज्यादा ऐसे है, जहां कोयले का स्टॉक खत्म होने वाला है या तो ख़त्म हो चूका है। कोयले की कमी के कारण कई पॉवर प्लांटों में बिजली का उत्पादन कम हो गया है। कई संयंत्र तो ठप्प पड़े हैं, तो किसी-किसी प्लांट में कोयले की भारी कमी हो गई है।

देश में बिजली संकट के बीच रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। अब पावर प्लांट को कोयला पहुंचाने के लिए 24 घंटे ट्रेन चल रही है। राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने कोयले की इस कमी को आपातकाल घोषित कर दिया है। सभी जोनल रेलवे के प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधकों को निर्देश दिए गए है कि वे चौबीसों घंटे संचालन नियंत्रण कक्षों को तैयार करें। आपको बता दे की सोमवार को प्रतिदिन लोड होने वाले कोयले की संख्या बढ़कर लगभग 440-450 हो गई। सोमवार को 1.77 मिलियन टन कोयले को ट्रांसफर किया गया, जो पिछले साल इसी दिन 1.48 मिलियन टन था।

भले ही मांग एक दिन में लगभग 500 रेक तक पहुंच जाती है, लेकिन ट्रांसपोर्टर इसे आराम से ही सप्लाई करेंगे। देश के पूर्वी हिस्से में कोयला क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कोयले आ रहे है और ऐसे क्षेत्रों में पूर्व मध्य रेलवे द्वारा सेवा दी जाती है। रेलवे मंत्रालय के अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक स्थिति एक या दो दिनों में सामान्य नहीं होगी और हम कोयला परिवहन की मांग को पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। लोडिंग-अनलोडिंग के साथ-साथ खाली रेकों की आवाजाही पर भी सख्ती से नजर रखी जा रही है। बिजली की मांग में परंपरागत रूप से गिरावट देखी जा रही है।

पावर प्लांटों में कोयले की डिमांड को पूरा करने में देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया पीछे है। स्थिति यह है कि कोल इंडिया प्रतिदिन 310 रैक की जगह मात्र 265 रैक ही आपूर्ति कर पा रही है। डीवीसी, एनटीपीसी, डब्ल्यूपीडीसीएल के पावर प्लाटों में स्टाक में भारी कमी हो गई है। भारत अपनी कोयला डिमांड का 30 फीसदी देश के बाहर से पूरा करता है। देश में कुल कोयला डिमांड का 70 फीसदी भारत के कोयला रिजर्व या प्रॉडक्शन से पूरा होता है। देश में करीब 300 अरब टन कोयले का भंडार है। इंडोनेशिया से ही आने वाले कोयले की कीमत करीब 60 डॉलर प्रतिटन से बढ़कर 200 डॉलर प्रति टन तक जा पहुंची है। भारत अपनी कोयला डिमांड का 30 फीसदी देश के बाहर से पूरा करता है। जिसके बाद देश के अंदर कोल इंडिया ने भी कोयले की कीमत बढ़ा दी।

भारत में इस्तेमाल होने वाली बिजली का 71 फीसदी थर्मल पावर प्लांट्स के जरिए पूरा होता है। थर्मल पावर प्लांट्स में कोयला संयंत्रों के अलावा गैस, डीजल और नेचुरल गैस बेस्ड प्लांट शामिल है। इसके अलावा देश की बिजली डिमांड का 62 फीसदी भारत के विशाल कोयला रिजर्व के जरिए पूरा होता है। बाकी डिमांड आयातित कोयले से पूरी होती है।

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